मंगलवार, 14 फ़रवरी 2017

@मड़ई मेला@


           हमर छत्तीसगढ़ माटी के एकठन प्रमुख परब (तिहार) मड़ई मेला हर आय। मड़ई के नाव लेत्तेच म मन  मा उत्साह अउ उमंग भर जथे। ए तिहार  ला हमर राउत भैया मन बड़ धूम धाम से मनाथे। मड़ई मेला देवारी ले लेके महाशिवरात्रि परब तक चलथे। मड़ई मेला के आयोजन राउत भैया अऊ पूरा गाँव भरके मिलके करवाथे। मड़ई के आयोजन राउत मन के बदना तको रथे। बदना के सेती  एकर आयोजन के खरचा  ला बदना बदइया हा अकेल्ला उठाथे। मड़ई के आयोजन राउत मन के कुल देवता बर श्रद्धा अउ बिश्वास आये। मड़ई कराथे तौ उंखर कुल देवता सदा सहाय रथे।
 
         मड़ई मेला आयोजन करेके पहली राउत भैया मन अपन जुराव करथे। जुराव मा गांव के सियान मन ला बलाथे अउ दिन तिथि तारीख ला पक्का करथे। पक्का करे के बाद गांव में हाँका परवाथे के अमुख तारीख अमुख दिन हमर गाँव में मड़ई मेला होही।पारा परोस के गाँव बाजार में तको हाँका परवाथे जेकर से आयोजन में बने बाजार तको लगय अउ आयोजन फसल रहै। राउत भैया मन अपन सगा राउत भाई मन ला नेवता भेजथे हमर गांव में अमुख दिन तारीख के मड़ई होही कहिके। एती गाँव में मड़ई के नाँव सुनते साथ गाँव भर में खुसी अउ उत्साह के लहर दँउड़े लगथे। गाँव भर के अपन बेटी माई, दीदी , बहनी सगा सम्बन्धी ला सोर पँहुचाथे। अपन बेटी माई दीदी बहनी ला लाने जाथे। राउत भैया मन गँड़वा बाजा गाजा के साथ नचवइया परी के तको जुगाड़ लगाथें जेकर से मड़ई मा रौनक बढ़ सकै।

        मड़ई मेला के दिन मुँधरहा ले राउत में अपन कुल देवता ला गाजा बाजा के संग नाचत कूदत उमंग से दोहा पारत गौठान (दइहान) मा मढ़ा देथें अऊ देवता के भाव भजन करे लगथें। फेर गाजा बाजा के संग गाँव के जम्मो देवी देवता ला नरियर सुपारी चढ़ाये बर अपन संग धरे, नेवता दे ला जाथें अउ उंखर भाव भजन करथें। गाँव भरके अपन किसान भाई मन ला तको नरियर के संग नेवता देथें। जम्मो किसान घर नेवता दे बर घलो गाजा बाजा के संग नाचत कूदत दोहा पारत गली गली जाथें। ओकर बाद  गौठान में जाके खीर अउ परसाद बनाथें अउ चढ़ाथें। नरियर सुपारी सँउपत भाव भजन करके देवता ल  मनाथें। खीर अउ परसाद ला फेर बाँट के खाथें। रउतइन दीदी मन आके बीच दइहान मा  गोबर के गोबरधन बनाथें। मंझनिया के होवत ले मेला मा दुकान सज जाय रथे। ढेलवा, खिलौना, किसम किसम के दुकान, नाना प्रकार के मिठाई, रंग रंग के टिकली फुकली, अउ साग भाजी के बाजार लगे रथे। मड़ई मेला ला देख के सबो के मन भर जथे।

       मंझनिया के बेरा होथे त गाँव के सगा पहुना, घर के बेटी माई, दाई दीदी, भैया भउजी, बबा नाती सबो सज धज के मेला देखे बर दइहान जाथें। राउत मन के अलग पहनावा अउ पोशाक सबके मन ला बड़ भाथे। घर ले राउत भैया मन नाचत कूदत दोहा पारत लाठी चालत अखाड़ा खेलत निकलथें। गँड़वा बाजा के अपन अलग धुन अउ परी मन के बिधुन हो के नचाई सबके मन ल मोह लेथे। दइहान मा आथे तहाँ ले सबले पहली नाचत नाचत सात भांवर मड़ई के घूमथें फेर गाय मेरा गोवर्द्धन खुंदवाथें अउ जमके नाचथें। सबला अपन लाठी के ताकत देखाथें। जब कोनो सगा भाई मन के राउत टोली आथे त ओला आधा बीच ले दउड़त आधा झन मन नाने ला नाचत नाचत जाथें। फेर संग में लाठी चालत अखाड़ा खेलत नाचत कूदत पारत दइहान में लाथें। देखइया मन के मन में उत्साह अउ उमंग छाये रथे। हमर मड़ई के उत्साह अउ उमंग हा पहाती बेरा में बन्द हो जथे।

      दूसर दिन राउत भैया मन गाजा बाजा के संग अपन किसान भाई मेर जोहार भेट करवाथें अउ आभार परगट करथें। ए प्रकार ले हमर मड़ई हा होथे। जेकर बखान करई असान नई हवै। हमर माटी के खुशबू हमर चिन्हार मड़ई मेला हर आय। फेर अब मड़ई परब तको हा नँदावत हवै। पहली गाँव गाँव में मड़ई मेला होवय फेर अब बहुत कम होथे। एमा राउत भैया मन के उदासीनता कहन ए मजबूरी। फेर शासन ला हर गाँव के पंचायत ला मड़ई मेला आयोजन बर सहायता राशि देना चाही ताकि हमर राउत भैया मन आयोजन ला कर सके साथ ही हमर संस्कृति हा सुरक्षित रहै।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट- नगधा,
तहसील नवागढ़, जिला-बेमेतरा
छत्तीसगढ़, मो.9977831273

मंगलवार, 22 नवंबर 2016

भींगे अँचरा दाई के

           आगे देवारी तिहार कहाँ अंजोर आये घर दुवार। देख आँखी ले आँसू बोहावत भींगत अँचरा दाई के। घर के बेटा परबुधिया होंगे , आस कहाँ कोउनो भाई के। सबो राज पाठ परदेसिया करय कहाँ बाँचय लाज बेटी माई के। घर के बेटा दारू मा चूर हवे उतरत रोज लाज बेटी माई के। बेटा ला का फरक पड़े बने दलाल बेचत लाज माई के। भाई के गर भाई काटे देख परोसी करै राज ला। अपन जाँगर के भरोसा छोड़ आज बनगे सबो अलाल। खेती खार सब बेच  खाये अब घूमे कुकुर बनके जात। सबो जगह लात खात फिर भी समझ नई आत। कब समझही माटी के पीरा रखही कब लाज बेटी माई के। जागव भैया अब अपन हक ला पहचानव जी। दारू के संग छोड़ काम मा हाथ बँटावव जी। माटी दाई के लाज रखव परदेसिया राज हटावव जी। बनव जागरूक मनखे अब बईमान ला भगाव जी। दाई के आँसू पोछव बोलव महतारी भाखा ला। पइसा खातिर झन बेचव अपन मान ईमान ला। करत हेम विनती हवे रैहव सबो सुख मा। राखव बिस्वास ला भाई भाई झन करव मनमानी जी। करव राज मिलके भाई भाई  तब आही देश मा नवा अंजोर जी।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़ मो. 9977831273

शनिवार, 3 सितंबर 2016

तीजा पोरा के दरद


       आज आठे ला मनाय चार दिन होगे हवे। देख तीजा लिहइया मन के आवई जावई चलत हवै। तिजहारिन दीदी बहनी मन आत जात हवै। मोटर बस के भीड़ के ठिकाना नई हवे। तीजा पोरा तिहार हमर छत्तीसगढ़ के बड़का तिहार आय। इहि तिहार में गाँव भरके बेटी माई एक जगह सकलाथे। अपन अपन दुःख सुख ला गोठियाथे। धन्य हवै हमर गाँव  तीजा पोरा के तिहार मा गाँव भरके बेटी माई सकलाही। जय हो मोर छत्तीसगढ़ तोर महिमा अपरम्पार।

       फुलमतिया अपन नोनी के मुड़ी ला कोरत हवै। नोनी दाई ला कहत हवे जल्दी कोर दाई इसकूल बर देरी होत हवे मोर सहेली मन गोरत हवै। नोनी सात बरस के होगे हवे दूसरी किलास में पढ़त हवै। नोनी बड़ चंचल सवभाव के हवे। मुड़ ला कोरा के इसकूल जाथे अपन संगवारी धनिया संग। इसकूल जाथे त पता चलथे की ओकर एकझन संगवारी फुलेसवरी हा ममा गाँव चल दे हवे। धनिया से नोनी पूछथे ममा गाँव काय होथे यार अउ मोर घर तो एको साल मोर ममा नाव के नई आय। धनिया हाँसत हाँसत बताथे। ममा गाँव माने दाई के गाँव जिहा ममा मामी, ममादाई बाबू, मौसी अऊ भाई बहनी रथे। नोनी अरे वाह मजा आत होही न, धनिया हव यार ममा गाँव जाबे त कोनो मारे न पिटे चारो मुड़ा ले मया दुलार मिलथे। रंग रंग के खाय ला अउ पहिरे ला मिलथे। नोनी के तको मन में ममा गाँव के लालसा जाग जथे। इसकूल के छुट्टी होगे। नोनी घर आके संगवारी संग खेले  के धुन में हवै। ओतके बेरा धनिया ला ओकर दाई बुला के ले जथे चल तोर ममा गाँव जाबो। नोनी ला अपन ममा गाँव के सुध लग जथे अऊ घर कुती अपन आ जथे मन मा सोचत रथे सबके ममा बबा मन लेगे ला आथे। मोर ममा, बबा मन काबर हमन ला लेगे ला नई आय।  नोनी घर में आके अपन दाई ला पूछथे दाई हमर ममा मन एको साल काबर नई आय लेगे ला। सबके ममा मन अपन दीदी बहनी के संग में भांची भाचा ला लेगे ला आथे। एतका बात ला सुनके नोनी के दाई के आँखी ले आँसू तरतर तरत निकले लागथे। ओकर आँखी मा दाई बाबू, भाई बहनी, संगी संगवारी के चेहरा झुलगे। ओकर जवानी के घाव हा ताजा होगे। चुपकन आँसू ला दबाके मनमें ढाढ़स बंधाके नोनी ला कथे कइसे करबे नोनी तोर ममा मन लेगे ल नई आय त, बरपेली कइसे चल देबो। नोनी कथे हमर जम्मो संगवारी मन ममा गाँव जात हवै महूँ ला ममा गाँव देखे के सउख लागथे दाई। ऊहो ममा दाई, बबा, ममा मामी उकर लइका मोर भाई बहनी होही न दाई। फुलमतिया नोनी के बात ला सुन सिसकपरथे अऊ ओकर आँखी ले आँसू निकल जाथे।नोनी दाई ला देखके कथे देख हमर दाई ला नाव लेते ही मया पलपलावत हवै अऊ सुरता मा रोवत हवे। नोनी तको रोय ला धर लेथे अऊ कथे का होगे दाई हमर ममा मन ला मया नई लागे त। महतारी हा नोनी ला पोटार बोम फाड़के रो डरथे। ओतके बेरा नोनी के ददा समारू आ जथे अऊ कथे तुमन काबर रोवत हव। मोर रहत ले काबर चिंता करथव कुछ कमी हवै त बताव। दुनो झन के आँसू ला पोछथे अऊ चुप कराथे। समारू समझ जथे तीजा पोरा आय हवै त दाई बाबू दीदी बहनी भाई के सुरता में रोवत हवै कहिके।नोनी रोवत रोवत सुत जथे। समारू कथे फुलमितया में जान डरेव तोर दरद ला ओ 7 बछर होगे हमन ला अपन गाँव से अलग करै। भगवान के दया से येदे रइपुर शहर में जियत खात हन बने नउकरी करके फेर अपन जनम भुइया अऊ महतारी के सुरता नई भुला पाये हन। हा सही कहत हस जी ओतेक दिन ले अपन मन ला मारके रहत रहेंव फेर आज नोनी ममा गाँव जाय बर कहत रहिस हवै त में अपन आप ला नई रोक पाय हव। तीजा पोरा तिहार हर बेटी के बड़का तिहार आय। कोन बेटी अपन दाई ददा के ये तिहार ला छोड़ सकत हवै।बोरो महिना के ये तिहार में गाँव के जम्मो संगी संगवारी, गाँव भर के बेटी माई सकलाही अऊ अपन सुख दुःख गोठियाही। जेने अभागा रही तेने ये तिहार ला छोड़ही। फुलमितया हा समारू बर खाना लगाथे फेर ओला गाँव के सुरता आ जथे अपन दाई ददा भाई बहनी के कौरा मुँह में जाबे नई करय। समारू भात ला छोड़ उठके रेंग देथे। फुलमतिया तको बिन खाय सो जथे। फुलमितया समारू ला कथे हमर करम के भोगना आज हमर लइका भोगत हवे। बपरी ककरो का बिगाड़े हवै। बस एतके न की ओ हमर लइका बनके आय हवै। बपरी इहि गलती कर परे हे। समारू फुलमतिया हमर लइका के ये सउख हमन नई पूरा कर सकन ओला कोन समझाही की हमन अपन समाज अपन गाँव ले बाहिर हन। समारू मन ला मार दसना ले उठके गली डहर चल देथे ओकर मनके दरद सहन नई होय अऊ रो परथे। फुलमिया के मन मा आज कई ठन सवाल उठत हवै। अपन आप ला कोसते की मै बहुत बड़े गलती कर परेव मोला भाग के दुसर जात मेर सादी नई करना रहिस हवै। मोला अपन दाई ददा के मान मर्यादा रखना रहिस हवै। मोर दाई बाबू ऊपर का बीतिस होही कइसे 7 बछर उकर बीतिस होही। फेर फुलमितया कथे फेर मोर गलती का रहिस हवै में तो अपन साथ में पढ़े लिखे लड़का मेर सादी करै हव। महूँ हा पढ़ै लिखे हव महूँ ला समझ हवै। समाज ला कथे वाह रे मोर समाज अपन दाई ददा अऊ मया जार ले दूर कर दे। तोला थोरको दया नई आईस। फेर नोनी ला देख कथे में अपन बेटी ला का बताहू। कइसे ओला मानहु की तोर ममा घर नई जा सकन कहिके। नोनी बाड़ जहि त मोर बारे में का सोचही आज फुलमितया ला अपन गलती के पछतावा होत हवै ओकर जी हा आज कचोटत हवै। अपन समाज मेर चीख चीख के पूछत हवै मोर गलती के सजा मोर बेटी ला काबर मिलत हवै। बपरी ममा गाँव जाहू कहत हे तीजा पोरा मनाय ओला कोन लेगही। फेर हर बछर के तीजा पोरा मा ये घाव हा हरा  हो जाही संग में मोर बेटी भोगही। फेर कथे धन्य हे नियाव करने वाला भगवान अऊ धन्य हे हमर समाज नियम बनाने वाला।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा
(छत्तीसगढ़) मो.9977831273

सोमवार, 8 अगस्त 2016

छत्तीसगढ़ के सुध कोन लेही


       हमर छत्तीसगढ़ ला राज् बने सोलह बछर होगे। सोला बछर में नवा नवा इतिहास लिखागे।
हमर माटी के किसमत तको बदलगे। बढ़िया बढ़िया गाँव में सरपंच, पंच बनिस त गाँव मन के भाग खुलगे। बढ़िया बढ़िया मन्त्री अऊ सरकार बनिस त हमर राज के काया पलटगे। हमर पुरखा के सपना तो आज पूरा होगे।
बड़ सपना देखे रहिस हमर राज बने बिकास करही कहिके। गाँव गाँव में सुराज आही कहिके। आज गाँव गाँव में निमगा सुराज आगे हवे लइका सियान सबो के मन बदलगे हवे। येहा आज के नवा अँजोर के परभाव आय। आँखी में देखबे अपन राज के बिकास ल त खुसी म आँखी ले आँसू आ जथे अऊ अबड़ सुख लगथे। हमर सियान हमर भविस के लइका मन सबो आज बिकास के जगा एक पउवा दारू के मांग करथे। गाँव तीर मन में तो दारू के भट्टी हवे। गाँव गाँव के सरपंच, पंच, सचिव मन के तो पांचो ऊँगली घी में रथे। अरे भई जब चुनाव म हमन दारू पीके अपन ओट डाले हन। फेर अपन हक ला कइसे मांग सकथन। अऊ उहू बपरा मन तो पइसा खरचा करे हवे निकालबे करही। अपन जेब ला भरे बर बने हवे बिकास बर थोड़े। हमर छत्तीसगढ़िया मनखे मन तको बड़ भुलाय हवे फोकट के चाँउर मिलत हवे का के ओला हे चिंता । आज उंकर जाँगर हा अलाल होगे ओला फेर नई देख पावत हवे।

       पढ़ाईया लइका मन के बाते निराला हवे काबर खाय ला मिलत हवे फोकट में। बपरा मन के दाई ददा मन खाना कहा देथे ये दरद ला हमर सरकार देखिस अऊ योजना ला बनाइस। आज पढ़ई ले जादा खाना जरुर हवे घर में तो लइका ला खाना मिलबे नई करय। बर कोउनो बड़ दुःख के बात आय हमर छत्तीसगढ़ीया मनखे ला तो अपन लइका बर मोह नई हवे। तेकर पाय के अपन लइका ला खाना नई खवाय ।  चलव ठीक हवे संगी इसकूल हा अब जिम्मा उठा ले हवे। पढ़ई के संग संग खवइ तको करही। आज तबे लइका मन बड़ होसियार हवे। भारी नालेज हवे फ़ैल तको नई होय। माने ल परही सरकार के योजना ला भई।

        कृषि बिकास म तो सरकार ह हर बछर पुरुसकार पावत हवे। हमर धान के उपज बड़गे हवे। तभे बपरा किसान मन के लागत हा नई छुटावत हवे। काबर आज धान के उपज बड़गे हवे, तभे बेपारी मन मनमरजी खरीदी ला करत हवे। आज धान के रेट गिर सकथे फेर बड़ नई सकय। अरे भई किसान के थोरे बाड़थे जी बेपारी मन के बाड़थे जी काबर उमन पहुँच वाला होथे अऊ टेक्स पताथे।

         बात करे जाय हमर राजधानी सहर के त बिकास के नवा नवा अँजोर लाय हवे, तभे तो भई गाँव ले अपन राजधानी रइपुर जाबे त अइसे लागथे जइसे अपन राज ले दुसर राज में आगेव। अपन आप ला अकेला पाबे। चारो मुड़ा खचाखच भीड़ अऊ फटाफट हिंदी बोलिया। छत्तीसगढ़ी बोलिया कोउनो कोउनो पाबे। रइपुर में छत्तीसगढ़ी बोलथे तेन ला गवाँर देहाती कथे गा बड़ दुःख लागथे। अपन राज के भासा ला अपन सहर नई पुछय। अब हमला कहिबे पट छत्तीसगढ़िया सेर आन सहर रहय या गाँव अपन भाखा में दहाड़े ला नई छोड़न। कतको सिखोले अपन रद्दा में आ जथन, फेर काय करबे सामने वाले ला समझ नई आय त हिंदी म बोले ला परथे।

          रइपुर बड़का सहर हरे दू तीन दिन ले पूरा सहर ला घूम डरेव। अपन छत्तीसगढ़िया मनखे मन के बंगला देखे के चक्कर में। फेर कउनो कउनो छत्तीसगढ़ीया के घर ला बंगला वाले पाबे बाकि सबो बाहिर के आय। अपन राजधानी सहर में जाबे त अइसे लगथे जइसे इहा हमर कोउनो नई हवे।

      हमर सोला बछर के बिकास आज देख डरेन। हमर पुरखा के सपना पूरा होगे दोस काला लगाबो। हमर भाई मन चुप बइठे देखत हवे। हमर नेता मन बिकास के नाम बर कोंदा बउला होगे हवे। देखले हमर छत्तीसगढ़ के नेता मन ला सरकार चलाय के ताकत नई हवे। तभे तो बाहिर के ला सफा राज पाठ दे के चुप बइठे देखत हवे। हमर भाखा के कउनो सुध नई लय न हमर माटी दाई के। जय हो हमर सरकार अऊ हमर राज के महामानव मनके। गोठ बात में सरग ला अमर देथे। फेर अमन राज के बिकास बर चुप हो जथे।

-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा
(छत्तीसगढ़) मो. 9977831273

शुक्रवार, 29 जुलाई 2016

@चिरई के गाँव गिधवा@

      संगवारी हो आज मेहा अपन गाँव के बारे में बतावत हव मोर गाँव गिधवा हरे, पोस्ट नगधा, थाना नांदघाट, तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा। मोर गाँव भाटापारा सहर ले 30 किलोमीटर, मुंगेली सहर ले 30 किलोमीटर, रइपुर सहर ले 75 किलोमीटर, बिलासपुर ले 70 किलोमीटर अऊ बेमेतरा सहर ले 70 किलोमीटर हवे। आपमन चारो मुड़ा ले आ सकत हव  बस के सुविधा हवे गाँव मेन रोड में परथे। आपमन ला नाव से ही पता चलत हवे गिधवा (गिध्द) चिरई के नाव आय सिरतोन में सही आय संगी मोर गाँव के नाव गिध्द के कारन गिधवा परिस हवे। गाँव के डोकरा बबा अउ सियान मन बताव संगी हमर गाँव में बड़े बड़े गिद्ध के बसेरा रहिस। गाँव के खार हा बन बरोबर रहिस कउनो मनखे बन अंदर नई जाय सकत रहिस। गाँव में नानम परकार के चिरई के डेरा रहय अउ उकर खाय पिए के कमी तको नई रहिस। फेर आज समे ला देख ले मोर गाँव के बन उजर गे, गिद्ध के डेरा सिरागे। मोर गाँव बड़ सुघ्घर हवे 54 एकड़ के बड़का जनी तरिया हवे आज तक न हमर ददा के सुरता म न बबा के सुरता म तरिया  के गहरी करन होय हे। आज तलाब हा उतली होगे हवे। जेन तलाब में बारो महीना पानी भरे रहय तेन तरिया में गरमी म एक खोची पानी नई बाँचय। तरिया  में नानम परकार के चिरई रहय सुघ्घर सुघ्घर फूल खिले रहय। आज भी तरिया म पानी रथे त नानम परकार ले चिरई देखे जा सकत हवे। हमर गाँव के बाँध तको अति सुघ्घर हवे 200 एकड़ के बाँध हवे फेर गहरा करन के मांग हवे। पानी भरते त रंग रंग के चिरई ला देखे जा सकत हवे। हमर गाँव के माटी चिरई चिरगुन ला अबड़ रास आथे। आज हमर गढ़ के पहली पक्षी विहार प्रस्तावित हवे फेर शासन के लापरवाही देख जा सकत हवे आज तक काम शुरू नई होय हवे। आसो सुक्खा के कारन तरिया अउ बाँध दुनो हा सूखा गे रहिस जेकर ले चिरई मन बिचकगे अगर शासन धियान ला नई दीही त गिधवा गाँव नाव के बस रही जहि अऊ चिरई चुरगुन सिरा जाही।

हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा।
मो न 9977831273

रविवार, 17 जुलाई 2016

@ढेकी@


          ढेकी हमर छत्तीसगढ़ के धन कुट्टी मसीन आय। ढेकी के नाव लेवत ओकर फोटो आँखी मा झूले ला धर लेथे। पुरखा के हमर निसानी आय फेर आज समे के साथ नंदागे। फेर आज भी ककरो ककरो घर देखे ला मिलथे।  पहली जवाना में साधन नई रहिस त एकरे उपयोग करत रहिस। आज आधुनिक साधन आय के बाद भले ढेकी हा नंदागे हावेे। फेर अपन समय म अबड़ काम के रहिस। आज भी ढेकी के उपयोग कउनो कउनो घर मा  करत हवे। आज के लइका मन ला पुछबे त काला ढेकी कथे बोलथे। ओला पता तको नई हवे  अऊ जानत तको नई हवे।ढेकी छत्तीसगढ़ के धान कुटे के मसीन आय। एमा पइसा या रुइया के जरूरत नई लगय मनखे के जाँगर अऊ समय के जरूरत पड़थे। ढेकी मसीन ला बनाय के समान ओकर भाग सबले पहली एकठन मोटा अकन डाड़ी जेला बढ़ई हा छोल चाच के लमसोर करथे आगू हा मोठहा अऊ पाछू हा पतला पाछू भाग ला छेद करथे जेमा थरा लगथे। एकर बाद एकठन मुसरी बनाय जाथे जेन हा लकड़ी के गोल रथे अऊ लोहा के चूड़ी पहिनाथे। पखना के बाहना बनाय जाथे पखाना ला गड्डा करके गोल रखे जाथे, दुठिन धुरखिली लगथे, अऊ एकठन थरा जोन डाड़ी के पाछू कुती लगथे दुनो धुरखिलि मा थरा मड़थे अऊ डाड़ी बिच मा। डाड़ी के पाछू में गड्डा रखथे ताकी ढेकी ला ऊपर नीचे कर सकय। डाड़ी, मुसरी, थरा, बहना, धुरा मिलके ढेकी बनथे। ढेकी ला चलाय बर दूँ मनखे लगथे एकझन कूटने वाला अऊ एकझन खोने वाला। ढेकी मा धान, दार, अउ कई जिनिस ला कूटथे। छरे के तको काम आथे। ढेकी मा मेहनत लगथे फेर बिजली अऊ पइसा के बचत करे जा सकत हवे जब भी खाली समय हवे ढेकी के उपयोग कर सकत हवे। ढेकी के कूटे चाउर मा स्वाद अबड़ रथे अऊ कनकी तको नई निकलय। पहली आधुनिक मसीन नई आय रहय त गाँव गाँव घरो घर ढेकी रखय। दिन भर काम बुता करके आतिस रतिहा आराम करतिस अउ चाँउर नई रतिस त होत बिहनिया पहरा के बेरा मा धान ला ढेकी मा कुटे के चालू कर दय। पारा परोस के मन तको जाग जाय अउ कहय देख मुधरहा होगे हवे फलाना घर के ढेकी बाजत हवे चाँउर सिरागे हवे त मुधरहा ला कूटत हवे। ढेकी के राग बड़ निक लागथे भुकरुस भुकरुस बजथे त। जब ढेकी मा धान कूटय ननन्द भौजाई ता  अबड़ हँसी मजाक होय। डोकरी दाई मन रंग रंग के हाना, किसम किसम के गोठ बताय। समे के पता तको नई चलय कब छीन बेरा होगे अउ धान तको कुटागे। अब तो मनखे मेरा ककरो मेर बात करे के समे नई हवे पहली के मन बुता काम करत करत कतका जिनगी के मजा लेवय। आज हमर ढेकी का सुरता बनके रहिगे हवे। छत्तीसगढ़ के नवा नवा लइका मन तो जानबे नई करय। हमर छत्तीसगढ़ीया भाई दीदी बहनी मन के फरज बनथे की हमर पुरखा के धरोहर ला संयोज के रखन। हमर आने वाला पीढ़ी मन जानय हमर जुन्ना धनकुट्टी मसीन ला।

पुरखा के चिन्हा हमर, रखबो संगी जतन।
जुग जुग ले सुरता रहै, नई देवन ग मिटन।।

शुक्रवार, 15 जुलाई 2016

मोर गाँव रोवत हवे


    आज मोर गाँव रोवत हवे आधुनिक दुनिया में मोर गाँव के अइसन हालत हवे। काला मैं दोष लगाव सरकार ला जोन कभू गाँव ला झांके नई हवे या मंत्री ला जेला मतलब नई हवे या फेर गाँव के सरपंच अउ पंच ला या अपन गाँव के मनखे ला। जम्मो झन ला कोई मतलब नई हवे मोला का करना हे मोला का करना हवे। अब सबले बड़े दोषी तो महि हरव संगी जोन पढ़ लिख के भी गाँव में सुराज नई ला सकेव। आज मोर गाँव के पावन भुइया गोहार लगावत हवे अउ रोवत मोला कहत हवे बेटा मै तोला अपन गोदी में खेलायेव पढ़ाये शिक्षित करेव आज यही दिन ला देखे बर, अरे तोर ले तो बने अनपढ़ गंवार हवे जेन तो मोर सेवा ला जानथे।
भुइया दाई के सवाल के जवाब मोर मेर नई हवे संगवारी आपमन मोला जवाब दव की मै अपन भुइया दाई बर का सेवा कर सकव।

ग्राम गिधवा पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा
छत्तीसगढ़, पिन 491340